अंतःप्रेरणा

प्रेरणा.. प्रोत्साहन.. यह सब आंतरिक चीज़े है | यह एहसास है जो खुद को खुद ही समझना पड़ता है |

प्रेरणादायी कहानियां, विचार अलग अलग तरीके से हम जानते है मगर, इसका एहसास होना ज़रूरी होता है | जब किसी व्यक्ति की बातें सुन कर, पढ़ कर, उनसे प्रेरणा लेकर जब हम उस विचारों को सफल तरीके से अपने जीवन में उतारते है तो यह जरिया बन जाता है उन सभी महान व्यक्तियों को श्रद्धांजलि और सन्मान प्रकट करने का | ऐसेही यह आदान प्रदान प्रक्रिया शुरू रहती है |

सही प्रेरणादायी चीज़ वोही है जो खुद को अंतःकरण से प्रोत्साहित करें | और वह चीज़ होती है उसका खुद को खुद से एहसास होना | सूर्य जैसे, स्वयंप्रकाशित !!

यह कविता ऐसीही है | जब कुछ नजर नहीं आ रहा था, दुर्बलता का एहसास हो रहा था तब यह अपनेआप कहीं से मेरीही मुझहिको प्रेरणा देने चली आयी |

 

मैं गिर रहा हूँ

 

अरे यार यह क्या हो गया

सब उल्टा पुल्टा सा हो गया

मरते मरते बचा

पर जीते जीते मर रहा हूँ

मै गिर रहा हूँ

 

कोई है?

मुझे बचाओ!

पाला पड़ा किसी बुरी चीज़ से मेरा

और सपना भी देखा था मैंने

की मैं खो गया हूँ

मैं गिर रहा हूँ

 

रात काफी थी

हर तरफ सन्नाटा था

तभी किसी चीज़ ने दस्तक दी

तब होश संभला तो देख रहा हूँ

मैं गिर रहा हूँ

 

फिर धीरे धीरे सुबह होने लगी

सन्नाटा सरसराहट में बदलने लगा

मैं भी सपने से जागने लगा

देखा और फिर समझा(३)

मैं गिर नहीं रहा हूँ

मैं उड़ रहा हूँ

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